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 पाकिस्तान में खेलने पर पेस ने कहा- फौज नहीं पूछती कि कहां लड़ने जाना है, मैं देश के लिए कहीं भी खेल सकता हूं

राजकिशोर(नई दिल्ली).46 साल के लिएंडर पेस का कहना है कि देश के झंडे तले खेलना गौरव की बात है। यह मायने नहीं रखता कि किस देश में किसके खिलाफ खेलना है। फौज देश के लिए लड़ने पर जाने से पहले नहीं पूछती है कि कहां जाना है और किससे लड़ना है। देश के लिए लड़ना उनका दायित्व है। ऐसे ही खिलाड़ियों की ड्यूटी है देश के लिए खेलना। पेस ने इंटरव्यू में यह बात कही। इंटरव्यू के प्रमुख अंश-

इस्लामाबाद में भूपति, बोपन्ना सहित कुछ सीनियर प्लेयर ने सुरक्षा कारणों से जाने से मना कर दिया था, लेकिन आपने स्वीकार कर लिया क्यों?

देश की फौज लड़ाई में जाने से पहले नहीं पूछती। ऐसे में बतौर खिलाड़ी मेरा भी दायित्व है कि देश के लिए खेलूं। सीनियर खिलाड़ी के तौर पर मेरी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। अन्य खिलाड़ियों की बात है, तो सभी के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

क्या आपको फेडरेशन से डेविस कप में खेलने के बुलावे की उम्मीद थी?
मैंने नहीं सोचा था कि मेरे पास कॉल आएगा। जब नॉन प्लेइंग कैप्टन रोहित राजपाल का फोन आया, तो मुझे आश्चर्य हुआ। मैं टीम के प्रदर्शन में अपना 100 फीसदी योगदान देना चाहता हूं।

काफी देर से खेलने की सूचना मिली। कम समय में तैयारी कैसे की?
सितंबर के बाद सीजन खत्म हो गया। जब मेरे पास कॉल गया, तो दूसरे दिन से ही तैयारी में जुट गया। 5 सप्ताह से रेगुलर अभ्यास कर रहा हूं। फिटनेस पर फोकस किया। अब पूरी तरह फिट हूं।

आप पाकिस्तान के खिलाफ पहले भी खेल चुके हैं। कैसा अनुभव रहा है?

मुझे पाक के साथ खेला अंतिम मैच आज भी याद है। वह मैच काफी मुश्किल भरा था। भारत का पांचवां मैच करो-मरो था। मैच बोपन्ना को खेलना था। उन्होंने किसी कारण से खेलने से मना कर दिया। मुझे इस महत्वपूर्ण मैच में खेलने के लिए जाना पड़ा। काफी दबाव था। चौथा सेट 6-0 से हार गया। मैच पांचवें सेट तक चला था। मसल्स भी अकड़ गईं थीं। खेलना मुश्किल था। अंतिम सेट टाई ब्रेकर में चला गया। पर मैं जीतने में कामयाब रहा।

कजाखस्तान का मौसम कितना चुनौतीपूर्ण होगा?
कजाखस्तान का मौसम टीम के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा। वहां माइनस 10 डिग्री तापमान है। दिल्ली के तापमान से काफी ज्यादा अंतर है। हालांकि इंडोर में मैच है। लेकिन खेलना काफी कठिन होगा। चोटिल होने की संभावना ज्यादा है। हमें मैच खेलने से पहले अपनी फिटनेस पर ध्यान देना होगा। इसलिए इस बार हम टीम के साथ दो फिजियो लेकर जा रहे हैं।

खेल में राजनीति ज्यादा हावी हो जाती है। आपका क्या मानना है?
खेलों से राजनीति को दूर रखा जाना चाहिए। चाहे, क्रिकेट हो, टेनिस हो, या हॉकी। इसमें राजनीति को नहीं लाया जाना चाहिए। खेल एकता के बंधन में बांधता है। खिलाड़ी को कोई मतलब नहीं होता है, कि कौन किस देश का है, उसकी जाति क्या है। खेल ही है, जो सबको जोड़कर रखता है।

-लिएंडर पेस, टेनिस खिलाड़ी



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फाइल फोटो।


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