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एक थी टीना: जहां 5 महीने की बच्ची को ऑक्सीजन दी जा रही थी, वहीं मंत्री के लिए रंगाई-पुताई चल रही थी

कोटा. शहर के सबसे बड़े जेके लोन सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को नवजात बच्चों की मौत का आंकड़ा 106 पहुंच गया। इनमें 15 दिन की एक बच्ची ने चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के अस्पताल में दौरे से पहले दम तोड़ दिया। वहीं, 5 माह की एक और बच्ची टीना की मौत मंत्री के दौरा कर लौटने के चंद मिनटों बाद हो गई। चिकित्सा मंत्री की आवभगत के लिए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से व्यस्त था। दूसरी तरफ यह मासूम बच्ची जिंदगी की जंग लड़ रही थी। प्रशासन का असंवदेनशील रवैया ऐसा था कि जहां निमोनिया से पीड़ित इस बच्ची को ऑक्सीजन दी जा रही थी, वहीं बाहर मंत्री के स्वागत के लिए रंगाई-पुताई चल रही थी। मजदूर धूल झाड़ रहे थे।

निमोनिया से पीड़ित थी बच्ची, रात को तबीयत बिगड़ी
दौसा जिले के लालसोट तहसील के रहने वाले लालाराम ने बताया कि गुरुवार को वे पत्नी और पांच महीने की बच्ची के साथ बूंदी आए थे। रात 12 बजे बच्ची की तबीयत बिगड़ गई। तब उसे रात को घर पर ही दवा दी। इसके बाद वह सो गई। शुक्रवार सुबह तबीयत फिर बिगड़ गई। तब वे उसे बूंदी के सरकारी अस्पताल ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उसे कोटा में जेके लोन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। लालाराम, उसकी पत्नी और अन्य परिजन बच्ची को लेकर शुक्रवार सुबह 11 बजे जेके लोन अस्पताल पहुंचे। एनआईसीयू वार्ड के बाहर लगी एक टेबल पर मासूम टीना को लेटाकर नर्सिंग स्टाफ उसे निबोलाइज करने लगा। उसे ऑक्सीजन भी दी जा रही थी।

दीवार की धूल झाड़ी जा रही थी
लापरवाही का आलम यह था कि जहां मंत्री के आने से पहले अस्पताल को चमकाने के लिए मजदूर रंग रोगन करने और धूल झाड़ने में व्यस्त थे, उसी के पास बच्ची को ऑक्सीजन पर रखा गया था। मंत्री के दाैरे की वजह से हरकत में आए अस्पताल प्रशासन ने यह ध्यान नहीं रखा कि रंगरोगन और धूल झाड़ने की वजह से निमोनिया से जूझ रहे बच्चों की तकलीफ बढ़ सकती है। जब अस्पताल के सीनियर डॉक्टर्स चिकित्सा मंत्री का दौरा करवाने में व्यस्त थे, तब मरीजों का इलाज रेंजीडेंट्स के भरोसे चल रहा था।

परिवार का आरोप- बड़े डॉक्टर वॉर्ड में नहीं आए
शाम करीब 5 बजे जब चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास दौरा कर अस्पताल से निकले, तब 20 मिनट बाद ही टीना के शव को लेकर उसके परिजन रोते बिलखते बाहर आए। परिवार के साथ मौजूद एक महिला का कहना था कि बड़े डॉक्टर वार्ड में नहीं आए। वे इंतजाम में जुटे रहे। अचानक मंत्री के जाने के बाद डॉक्टर्स ने टीना के दम तोड़ने की बात कही और परिवार के लोगों को रवाना कर दिया।



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एनआईसीयू वार्ड के बाहर टेबल पर टीना के उपचार में जुटे नर्सिंगकर्मी।
एक तरफ टीना का उपचार चल रहा था, वहीं रंग रोगन और धूल झाड़ने का काम जारी था।
5 माह की बेटी के इलाज के दौरान मां की आंख से आंसू निकलते रहे।
चिकित्सा मंत्री के अस्पताल से लौटते ही डॉक्टरों ने टीना को मृत घोषित कर दिया।
टीना की मौत के बाद उसकी मां को संभालते परिजन।


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