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क्या फ्लाइट में सफर करना मुश्किल भरा होगा? जानें कोरोना के दौर में क्या बदलने वाला है?

कोरोनावायरस ने किसी इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है, तो वो है एविएशन। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) का अनुमान है कि कोरोना की वजह से दुनियाभर की एविएशन इंडस्ट्री को अभी तक 31 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

भारत समेत कई देशों में डोमेस्टिक फ्लाइट तो शुरू हो गई हैं, लेकिन इंटरनेशनल फ्लाइट अभी भी पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाई हैं। यही वजह है कि कोरोना के असर से इंडस्ट्री को उबारने के लिए IATA एक नया प्लान लेकर आई है और वो है कोविड पासपोर्ट। ये क्या है? इसकी जरूरत क्यों पड़ी? क्या इससे हवाई सफर करना मुश्किल हो जाएगा? आइए जानते हैं...

कोविड पासपोर्ट क्या है?
दरअसल, IATA एक मोबाइल ऐप पर काम कर रहा है, जो दुनियाभर में ट्रैवल पास की तरह समझा जाएगा। इस ऐप को कोरोना की वजह से लाने का प्लान है, इसलिए इसे कोविड पासपोर्ट कहा जा रहा है। IATA के इस ऐप में यात्री के कोरोना टेस्ट, उसे वैक्सीन लगी है या नहीं (वैक्सीन आने के बाद) जैसी जानकारी होगी। इसके साथ ही इस ऐप में यात्री के पासपोर्ट के ई-कॉपी भी होगी।

इस ऐप पर यात्री का QR कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही उसकी सारी डिटेल सामने आ जाएगी। ये ऐप IATA के मौजूदा टाइमैटिक सिस्टम पर बेस्ड होगी, जिसका इस्तेमाल डॉक्यूमेंट को वेरिफाई करने के लिए होता है। इसके साथ ही ये ऐप ब्लॉक-चैन टेक्नोलॉजी पर काम करेगा और इसमें यूजर का डेटा स्टोर नहीं होगा।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
इसकी जरूरत इसलिए पड़ रही है, क्योंकि इंटरनेशनल फ्लाइट से आने वाले पैसेंजर्स कोरोना पॉजिटिव मिल रहे हैं। चीन की वेबसाइट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, पिछले दिनों शंघाई में कई कोरोना पॉजिटिव केस आए। इनमें से कई ऐसे थे जो यात्रा करके लौटे थे।

9 नवंबर से भारत और ओमान के बीच एयर बबल एग्रीमेंट के तहत इंटरनेशनल उड़ान शुरू हुई। इस दौरान भी कई यात्री पॉजिटिव निकले, जिसके बाद सीटों की संख्या 10 हजार से घटाकर 5 हजार कर दी गई।
वहीं, हॉन्गकॉन्ग ने भी कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद 3 दिसंबर तक एयर इंडिया की फ्लाइट पर रोक लगा दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में आने वाले हर व्यक्ति के लिए RT-PCR टेस्ट कराना जरूरी कर दिया है। फिर चाहे वो बस से आए या ट्रेन से या फ्लाइट से।

इंटरनेशनल फ्लाइट से कोरोना पॉजिटिव आने के बाद IATA को एक ऐसे ऐप की जरूरत महसूस हुई, जो यात्री के कोरोना टेस्ट से लेकर उसकी हर डिटेल बता सके। ताकि दोबारा से इंटरनेशनल फ्लाइट को सही तरह से शुरू किया जा सके और बार-बार इन्हें रोकने की जरूरत न पड़े।

क्या और भी कोई कारण?
हां। कोरोना की वजह से दुनिया की इकोनॉमी को झटका लगा है। एविएशन इंडस्ट्री को भी नुकसान झेलना पड़ा है। IATA के मुताबिक, कोरोना की वजह से इस साल एयरलाइन कंपनियों को 84.3 अरब डॉलर यानी करीब 6.23 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। जबकि, उनके रेवेन्यू में भी 419 अरब डॉलर (31 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान होने की आशंका है। इसके अलावा यात्रियों की संख्या भी कम हो गई। एविएशन के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब पायलटों की भी नौकरियां गईं। इन्हीं सबसे उबरने के लिए ऐसी कोशिशें की जा रही हैं।

क्या इससे हवाई सफर करना मुश्किल हो जाएगा?
नहीं, बल्कि इससे हवाई सफर पहले की तरह ही सेफ होगा। अमेरिका सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) का कहना है कि फ्लाइट में यात्री जगह-जगह सतहों को छूते हैं। कम जगह होने की वजह से यहां सोशल डिस्टेंसिंग भी रख पाना मुमकिन नहीं है।

कुछ फ्लाइट में इन-बिल्ट एयर फिल्ट्रेशन और वेंटिलेशन सिस्टम होता है, जो किसी भी तरह के वायरस को फैलने नहीं देता और फ्लाइट के अंदर की हवा को साफ करता रहता है, लेकिन ऐसा सिस्टम हर फ्लाइट में नहीं होता। इसलिए कोविड पासपोर्ट होने से इन सारी परेशानियों से बचा जा सकेगा।

IATA कब तक इस ऐप को लॉन्च कर देगा?
इस साल इस ऐप की पायलट टेस्टिंग शुरू हो जाएगी। जबकि, मार्च 2021 तक इसे एपल डिवाइस के लिए लॉन्च करने की बात कही जा रही है। वहीं, एंड्रॉयड डिवाइस के लिए इसे अप्रैल 2021 तक लॉन्च किया जा सकता है।



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What Is Covid Passport, Digital Passport? International Air Transport Association Is Working On Mobile App


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मुंबई के एक अस्पताल में 50% कोरोना पीड़ितों में कावासाकी के लक्षण, जानें क्या है और कैसे बचें

दुनिया भर में कोरोना के मरीजों में कावासाकी के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। लेकिन अभी तक इसके लक्षण जिन कोरोना पीड़ितों में देखने को मिले, उनमें ज्यादातर बच्चे थे। कावासाकी वैसे भी बच्चों की बीमारी मानी जाती है। लेकिन क्या हो जब यह बीमारी बच्चों के साथ-साथ 40 से 60 साल के एडल्ट्स में भी दिखने लगे?

कोरोनावायरस पर अभी भी तमाम रिसर्च जारी है, बहुत सी रिपोर्ट आ भी चुकी हैं। अभी तक यह संक्रमण डॉक्टर्स और रिसर्चर्स के लिए पहेली ही बना हुआ है। हाल ही में मुंबई के कोकिलाबेन हॉस्पिटल के ICU में एडमिट कोरोना के 50% से ज्यादा मरीजों में कावासाकी के लक्षण दिखे। हैरान करने वाली बात यह है कि इनकी उम्र 40 से 60 साल के बीच है।

भोपाल AIIMS की डॉ. उमा कुमारी कहती हैं कि कोरोना की वजह से इम्यून डिसऑर्डर हो रहा है। कावासाकी भी इसी वजह से होता है। यह बच्चों की बीमारी है, एडल्ट में इसके लक्षण दिखने की वजह रिसर्च का विषय है।

क्या होता है कावासाकी?

  • कावासाकी रोग को म्यूकोस्यूटियस लिम्फ नोड सिंड्रोम भी कहा जाता है। यह बचपन में होने वाली एक दुर्लभ बीमारी है, जो ब्लड वेसल्स को प्रभावित करती है। ये त्वचा, नाक, गले और मुंह के अंदर स्थित म्यूकस मेम्ब्रेन पर प्रभाव डालती है।

  • कावासाकी होने पर बच्चों की पूरी बॉडी में रक्त वाहिकाओं में सूजन आ जाती है। इससे कोरोनरी आर्टरी क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यह रक्त वाहिकाएं ब्लड को हार्ट तक लेकर जाती हैं। इससे हार्ट की दिक्‍कत भी हो सकती है।

कावासाकी रोग होना कितना सामान्य है?

  • जापान, कोरिया और ताइवान समेत वेस्ट एशिया में कावासाकी रोग 10-20 गुना ज्यादा है। इससे पीड़ित अधिकतर बच्चे पांच वर्ष से कम उम्र के होते हैं। लड़कियों की तुलना में लड़कों में इसकी संभावना दोगुनी होती है।

कावासाकी रोग के क्या लक्षण हैं?

इस बीमारी के लक्षण कई स्टेज में उभर कर आते हैं। पहले और दूसरे स्टेज में इसका इलाज आसानी से हो जाता है। लेकिन अगर यह तीसरे या उसके बाद के स्टेज में पहुंच जाए, तो इससे उबरने में सालों लग जाते हैं। तीसरे या उसके बाद की स्टेज में इसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं।


कावासाकी रोग का क्या कारण है?

  • एक्सपर्ट्स के पास अभी तक इस बीमारी के सटीक कारण के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। अक्सर कावासाकी रोग सर्दियों के अंत में होता है।

  • कई सिद्धांतों में इस बीमारी का संबंध बैक्टीरिया, वायरस या पर्यावरणिक वजहों से जोड़ा गया है, लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी वजह की पुष्टि नहीं की गई है। कुछ जीन आपके बच्चे में कावासाकी रोग के फैलने की संभावना बढ़ा सकते हैं।

हार्ट के लिए खतरनाक कावासाकी

यह बीमारी हार्ट को प्रभावित करती है। कावासाकी रोग से पीड़ित ज्यादातर बच्चे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और उन्हें किसी भी तरह की समस्या नहीं होती है। हालांकि, ज्यादा बढ़ जाने से यह हार्ट को बुरी तरह डैमेज कर सकता है।


कोरोना से इसका क्या कनेक्शन

  • डॉ. उमा के मुताबिक, कोरोना में हमारा इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। उसे हम दोबारा भी मेंटेन कर सकते हैं। लेकिन बहुत से पीड़ितों में इम्यून डिसऑर्डर की समस्या भी देखी जा रही है।

  • इम्यून डिसऑर्डर में हमारे इम्यून सिस्टम ठीक से फंक्शन नहीं करते। इसके चलते कई बार ये अपने ही बॉडी के खिलाफ ट्रिगर कर जाते हैं।

  • कावासाकी भी इम्यून डिसऑर्डर से होता है। लेकिन इसे अभी पुख्ता तौर पार नहीं कहा जा सकता कि कोरोना पीड़ितों में कावासाकी के लक्षण दिखने की वजह इम्यून डिसऑर्डर है।

कोरोना के दौर में इससे भी बचना जरूरी

  • डॉ. उमा कहती हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कावासाकी के लक्षण सभी कोरोना पीड़ितों में देखने को मिल रहे है। लेकिन यह बीमारी ठंड में होती है, इसलिए इस दौर में अगर कोरोना हो जाता है, तो इसके भी होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चों में यह खतरा विशेष तौर पर है। इससे बचने का एक ही तरीका है कि हम खुद को मजबूत रखें।



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Kawasaki symptoms in 50% corona victims in a hospital in Mumbai, know what is and how to avoid


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जब दुनिया के किसी मुस्लिम देश में पहली बार चुनी गई महिला प्रधानमंत्री, सिर्फ 35 साल थी उनकी उम्र

हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में आज ही के दिन कोई महिला प्रधानमंत्री बनी थी। ये न सिर्फ पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि किसी मुस्लिम देश की भी पहली महिला थीं, जो प्रधानमंत्री बनीं। इनका नाम था बेनजीर भुट्टो। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की सबसे बड़ी बेटी थीं बेनजीर, जिनका जन्म 21 जून 1953 को कराची शहर में हुआ था।

बेनजीर भुट्टो ने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। 1977 में बेनजीर लंदन से पाकिस्तान लौट आईं। 1978 में जनरल जिया उल-हक पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। उनके आते ही बेनजीर के पिता जुल्फिकार अली भुट्टो को हत्या के एक मामले में फांसी हो गई। पिता की मौत के बाद बेनजीर ने राजनीतिक विरासत को संभाला।

10 अप्रैल 1986 को उन्होंने पाकिस्तान में सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। 1988 में एक प्लेन क्रैश में जिया उल-हक की मौत हो गई। उसके बाद 1 दिसंबर 1988 को बेनजीर पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। प्रधानमंत्री बनने से 3 महीने पहले ही उन्होंने बेटे को जन्म दिया था। जिस समय वो प्रधानमंत्री बनीं, उस समय उनकी उम्र 35 साल थी।

बेनजीर भुट्टो दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। पहली बार 1988 से 1990 तक और दूसरी बार 1993 से 1996 तक। भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने पर बेनजीर को 1999 में देश छोड़ना पड़ा था। 2007 में जब फौजी ताकत दम तोड़ रही थी और लोग लोकतंत्र के लिए आवाज उठा रहे थे, तब बेनजीर भुट्टो लौटी थीं। 27 दिसंबर 2007 को चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या कर दी गई।

लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम पर लगा मैडम तुसाद का मोम का पुतला।

मोम के पुतले बनाने वाली मैडम तुसाद का जन्म
1 दिसंबर 1761 को मैडम तुसाद का जन्म फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुआ था। उनका नाम मैरी ग्रासहोल्ट्ज था। उनकी मां पेरिस में डॉ. फिलिप कर्टियस के यहां काम करती थीं। डॉ. कर्टियस मोम के पुतले बनाया करते थे। डॉ. कर्टियस से ही मैडम तुसाद ने मोम के पुतले बनाना सीखा। मैडम तुसाद ने 16 साल की उम्र में पहला मोम का पुतला बनाया था। उन्होंने उस समय एक फिलॉस्फर फ्रैंक्वाइस वॉल्टैयर का पुतला बनाया था।

फ्रेंच रिवोल्यूशन के दौरान उन्होंने तीन महीने जेल में भी काटे। 1794 में उन्होंने फ्रैंक्वाइस तुसाद से शादी की। 1835 में उन्होंने लंदन की बेकर स्ट्रीट पर पहला स्टूडियो खोला। 1850 में 89 साल की उम्र में मैडम तुसाद का निधन हो गया। 1884 में उनका म्यूजियम बेकर स्ट्रीट से मेरिलबोन रोड पर शिफ्ट कर दिया गया, जहां ये आज भी है।

भारत और दुनिया में 1 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1640 : पुर्तगाल की 60 वर्ष की गुलामी के बाद स्पेन आजाद हुआ।
  • 1761 : मोम के पुतलों के संग्रहालय बनाने वाली मैडम तुसाद का जन्म।
  • 1959 : दुनिया के 12 देशों ने अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर कर अंटार्कटिक महाद्वीप को तमाम सैन्य गतिविधियों से मुक्त करके वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए संरक्षित रखने का संकल्प लिया।
  • 1959 : बाहरी अंतरिक्ष से पृथ्वी का पहला रंगीन फोटो लिया गया।
  • 1963 : नगालैंड भारत का 16वां राज्य बना।
  • 1965 : सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना।
  • 1973 : इजरायल के संस्थापक डेविड बेन गुरियन का निधन।
  • 1987 : अफगानिस्तान में नए संविधान के अनुसार डॉ. नजीबुल्लाह को देश का राष्ट्रपति चुना गया।
  • 1991 : एड्स डे की शुरुआत।
  • 1990 : पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित का निधन।
  • 2001 : अफगानिस्तान में कंधार एयरपोर्ट पर तालिबान विरोधी कबायली संगठन का कब्जा।
  • 2008 : बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष शिवचंद्र झा का निधन।


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Aaj Ka Itihas India World 1 December 2020 | Pakistan First Female PM Benazir Bhutto, BSF Establishment Year


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किसान पर पुलिस की बर्बरता की फोटो कांग्रेसी प्रोपेगैंडा है? BJP आईटी सेल के हेड का दावा झूठा

क्या हो रहा है वायरल : राहुल गांधी ने 28 नवंबर को एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की। फोटो में एक बुजुर्ग किसान को सुरक्षा बल का जवान लाठी मारता दिख रहा है।

भाजपा आईटी सेल के इंचार्ज अमित मालवीय ने राहुल को जवाब देते हुए 15 सेकंड का वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में दिख रहा है कि पुलिसकर्मी ने लाठी उठाई जरूर, पर किसान को लाठी लगी नहीं।

सोशल मीडिया पर अमित मालवीय द्वारा शेयर किया गया वीडियो अब इसी दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि असल में पुलिस ने किसी पर लाठी बरसाई ही नहीं। भास्कर ने इस दावे की पड़ताल की।

और सच क्या है ?

  • राहुल गांधी ने सिर्फ एक फोटो शेयर किया। अमित मालवीय ने भी केवल 15 सेकंड का ही वीडियो शेयर किया। इंटरनेट पर हमने वीडियो के की-फ्रेम्स के जरिए वह पूरा वीडियो खंगालना शुरू किया, जिसका छोटा हिस्सा शेयर कर अमित मालवीय ने इसे प्रोपेगैंडा बताया है।
  • EURO News की वेबसाइट पर हमें 50 सेकंड का वीडियो मिला। इसमें देखा जा सकता है कि वृद्ध किसान पर एक के बाद एक सुरक्षा बल के 2 जवानों ने लाठी मारी। यही नहीं, इसके बाद कई अन्य प्रदर्शनकारियों को भी लाठी मारी गई।
  • RT के यूट्यूब चैनल पर 1:30 मिनट के इस वीडियो में भी देखा जा सकता है कि बुजुर्ग किसान के बाद कई अन्य प्रदर्शनकारियों पर भी सुरक्षा बल के जवानों ने लाठियां भांजीं।

  • साफ है कि भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय का ये दावा झूठा है कि वायरल फोटो में दिख रहे किसान के साथ हिंसा नहीं हुई।


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Rahul Gandhi Vs Amit Malviya BJP IT Cell; Congress leader shared Pictures On Twitter Which Farmer Beaten By Cops


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विदेशी जमीन पर लगातार दूसरे क्लीन स्वीप से बचने उतरेगी टीम इंडिया, बॉलर्स का फॉर्म में आना जरूरी

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला बुधवार को कैनबरा में खेला जाएगा। मनुका ओवल मैदान पर जब भारत मैदान पर उतरेगा, तब उसके सामने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अपनी पहली जीत दर्ज करने की चुनौती होगी। इसके साथ ही टीम विदेशी जमीन पर लगातार दूसरे क्लीन स्वीप से बचना चाहेगी। इससे पहले जनवरी-फरवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर भारत को कीवी टीम ने 3-0 से हराया था।

कैनबरा के मैदान की बात करें, तो ऑस्ट्रेलिया ने यहां खेले अपने चारों मुकाबले जीते हैं। वहीं, भारत ने इस मैदान पर अब तक कुल 2 मुकाबले खेले हैं और दोनों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। इस सीरीज में भारतीय बॉलर्स स्ट्रगल करते नजर आए हैं। ऐसे में अगर भारत को जीत दर्ज करनी है, तो बॉलर्स को लय में आना होगा।

सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों का बोलबाला
सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज पूरी तरह से भारतीय बॉलर्स पर हावी रहे हैं। स्टीव स्मिथ ने पिछले दोनों वनडे में शतक जड़ा। वहीं, कप्तान एरॉन फिंच ने पहले वनडे में शतक और दूसरे मुकाबले में फिफ्टी लगाई। चोट की वजह से सीरीज से बाहर होने वाले डेविड वॉर्नर ने भी दोनों मुकाबलों में फिफ्टी लगाई। स्मिथ-फिंच के अलावा मार्नस लाबुशाने और ग्लेन मैक्सवेल भी अच्छी फॉर्म में हैं।

भारतीय बल्लेबाजों की बात करें, तो उन्हें शुरुआत तो मिली, लेकिन वे उसे बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर सके। शिखर धवन और हार्दिक पंड्या ने पहले वनडे में फिफ्टी लगाई, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। इसके बाद दूसरे वनडे में कप्तान विराट कोहली और उप-कप्तान लोकेश राहुल ने फिफ्टी लगाई, लेकिन बड़ा स्कोर नहीं बना सके। ऐसे में तीसरे वनडे में भारतीय बल्लेबाजों को बड़ा स्कोर बनाकर टीम को जीत दिलानी होगी।

भारतीय गेंदबाज लय में नहीं दिखे
टीम की गेंदबाजी भारत की हार का सबसे बड़ी वजह रही है। भारतीय बॉलर्स शुरुआती ओवर में विकेट नहीं ले पा रहे हैं। यही नहीं, भारतीय बॉलर्स को जमकर रन पड़ रहे हैं। मोहम्मद शमी-जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज गेंदबाज भी रन रोकने में नाकाम साबित हुए हैं। ऐसे में अगर टीम को जीतना है, तो बॉलर्स को जिम्मेदारी लेनी होगी और कंगारू टीम के विकेट निकालने होंगे।

वॉर्नर-कमिंस की गैर-मौजूदगी भारत के लिए मौका
चोट की वजह से वॉर्नर टीम का हिस्सा नहीं हैं। वहीं, पैट कमिंस को टेस्ट सीरीज की तैयारी के मद्देनजर आराम दिया गया है। ऐसे में इन दोनों दिग्गजों के न होने से भारत के पास अच्छा मौका होगा। भारतीय बॉलर्स पिछले 5 मुकाबले से पावर-प्ले के दौरान चले आ रहे विकेटों के सूखे को दूर कर सकते हैं और भारतीय बल्लेबाज कमिंस की गैर-मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया पर अटैक कर सकते हैं।

कोहली के पास एक और रिकॉर्ड बनाने का मौका
भले ही भारत यह सीरीज हार चुका है, लेकिन तीसरे वनडे में कोहली के पास एक और रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका होगा। कोहली अगर इस मैच शतक जड़ने में कामयाब हो जाते हैं, तो वे बतौर कप्तान सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन जाएंगे। अभी कोहली और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम 41-41 शतक दर्ज हैं।

ऑस्ट्रेलिया से 7वीं सीरीज हारा भारत
शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर ऑस्ट्रेलिया पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुका है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच इस सीरीज को मिलाकर कुल 13 वनडे सीरीज खेली गईं हैं। इसमें ऑस्ट्रेलिया ने 7 और भारत ने 6 सीरीज अपने नाम कीं हैं। ऑस्ट्रेलिया ने घर में भारत के खिलाफ 3 द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेलीं, जिसमें दो जीती और एक हारी है।

मौसम और पिच रिपोर्ट
कैनबरा में सामान्य रूप से आसमान साफ रहेगा। बीच-बीच में बादल छा सकते हैं। अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। पिच से बल्लेबाजों को मदद मिल सकती है। यहां खेले गए पिछले 9 वनडे मैचों में पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का सक्सेस रेट 77.77% है।

हेड-टू-हेड
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अब तक 142 वनडे खेले गए। इसमें टीम इंडिया ने 52 मैच जीते और 80 हारे हैं, जबकि 10 मुकाबले बेनतीजा रहे। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी के घर में भारतीय टीम ने 53 वनडे खेले, जिसमें से 13 जीते और 38 मैच हारे हैं। 2 वनडे बेनतीजा रहे।

भारतीय वनडे टीम

  • बैट्समैन: विराट कोहली (कप्तान), शुभमन गिल, शिखर धवन, लोकेश राहुल (उपकप्तान, विकेटकीपर), मनीष पांडे, श्रेयस अय्यर, मयंक अग्रवाल और संजू सैमसन (विकेटकीपर)।
  • ऑलराउंडर: हार्दिक पंड्या और रविंद्र जडेजा।
  • बॉलर्स: युजवेंद्र चहल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, नवदीप सैनी, शार्दूल ठाकुर और टी नटराजन।

ऑस्ट्रेलिया वनडे टीम

  • बैट्समैन: एरॉन फिंच (कप्तान), एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), स्टीव स्मिथ, डी'आर्की शॉर्ट, मैथ्यू वेड (विकेटकीपर)।
  • ऑलराउंडर: मार्नस लाबुशाने, मोइसेस हेनरिक, ग्लेन मैक्सवेल, डेनियल सैम्स, मार्कस स्टोइनिस और कैमरॉन ग्रीन।
  • बॉलर्स: पैट कमिंस, सीन एबॉट, एश्टन एगर, जोश हेजलवुड, मिचेल स्टार्क, एंड्र्यू टाई और एडम जम्पा।

भारत ने पिछली सीरीज में 2-1 से ऑस्ट्रेलिया को हराया था
पिछली बार भारतीय टीम ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 3 वनडे की सीरीज खेली थी। पहला वनडे हारने के बाद टीम इंडिया ने यह सीरीज 2-1 से जीती थी। तब भी भारतीय टीम की कमान विराट कोहली के हाथ में ही थी। ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी भी एरॉन फिंच के ही पास थी।



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India vs Australia 3rd ODI Oval Update Virat Kohli Steve Smith | Head To Head Match Stats, Winning and Pitch Prediction & Weather Analysis


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जब दुनिया के किसी मुस्लिम देश में पहली बार चुनी गई महिला प्रधानमंत्री, सिर्फ 35 साल थी उनकी उम्र

हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में आज ही के दिन कोई महिला प्रधानमंत्री बनी थी। ये न सिर्फ पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, बल्कि किसी मुस्लिम देश की भी पहली महिला थीं, जो प्रधानमंत्री बनीं। इनका नाम था बेनजीर भुट्टो। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की सबसे बड़ी बेटी थीं बेनजीर, जिनका जन्म 21 जून 1953 को कराची शहर में हुआ था।

बेनजीर भुट्टो ने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। 1977 में बेनजीर लंदन से पाकिस्तान लौट आईं। 1978 में जनरल जिया उल-हक पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। उनके आते ही बेनजीर के पिता जुल्फिकार अली भुट्टो को हत्या के एक मामले में फांसी हो गई। पिता की मौत के बाद बेनजीर ने राजनीतिक विरासत को संभाला।

10 अप्रैल 1986 को उन्होंने पाकिस्तान में सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। 1988 में एक प्लेन क्रैश में जिया उल-हक की मौत हो गई। उसके बाद 1 दिसंबर 1988 को बेनजीर पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। प्रधानमंत्री बनने से 3 महीने पहले ही उन्होंने बेटे को जन्म दिया था। जिस समय वो प्रधानमंत्री बनीं, उस समय उनकी उम्र 35 साल थी।

बेनजीर भुट्टो दो बार पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। पहली बार 1988 से 1990 तक और दूसरी बार 1993 से 1996 तक। भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने पर बेनजीर को 1999 में देश छोड़ना पड़ा था। 2007 में जब फौजी ताकत दम तोड़ रही थी और लोग लोकतंत्र के लिए आवाज उठा रहे थे, तब बेनजीर भुट्टो लौटी थीं। 27 दिसंबर 2007 को चुनाव प्रचार के दौरान उनकी हत्या कर दी गई।

लंदन के मैडम तुसाद म्यूजियम पर लगा मैडम तुसाद का मोम का पुतला।

मोम के पुतले बनाने वाली मैडम तुसाद का जन्म
1 दिसंबर 1761 को मैडम तुसाद का जन्म फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुआ था। उनका नाम मैरी ग्रासहोल्ट्ज था। उनकी मां पेरिस में डॉ. फिलिप कर्टियस के यहां काम करती थीं। डॉ. कर्टियस मोम के पुतले बनाया करते थे। डॉ. कर्टियस से ही मैडम तुसाद ने मोम के पुतले बनाना सीखा। मैडम तुसाद ने 16 साल की उम्र में पहला मोम का पुतला बनाया था। उन्होंने उस समय एक फिलॉस्फर फ्रैंक्वाइस वॉल्टैयर का पुतला बनाया था।

फ्रेंच रिवोल्यूशन के दौरान उन्होंने तीन महीने जेल में भी काटे। 1794 में उन्होंने फ्रैंक्वाइस तुसाद से शादी की। 1835 में उन्होंने लंदन की बेकर स्ट्रीट पर पहला स्टूडियो खोला। 1850 में 89 साल की उम्र में मैडम तुसाद का निधन हो गया। 1884 में उनका म्यूजियम बेकर स्ट्रीट से मेरिलबोन रोड पर शिफ्ट कर दिया गया, जहां ये आज भी है।

भारत और दुनिया में 1 दिसंबर की महत्वपूर्ण घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1640 : पुर्तगाल की 60 वर्ष की गुलामी के बाद स्पेन आजाद हुआ।
  • 1761 : मोम के पुतलों के संग्रहालय बनाने वाली मैडम तुसाद का जन्म।
  • 1959 : दुनिया के 12 देशों ने अंटार्कटिक संधि पर हस्ताक्षर कर अंटार्कटिक महाद्वीप को तमाम सैन्य गतिविधियों से मुक्त करके वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए संरक्षित रखने का संकल्प लिया।
  • 1959 : बाहरी अंतरिक्ष से पृथ्वी का पहला रंगीन फोटो लिया गया।
  • 1963 : नगालैंड भारत का 16वां राज्य बना।
  • 1965 : सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना।
  • 1973 : इजरायल के संस्थापक डेविड बेन गुरियन का निधन।
  • 1987 : अफगानिस्तान में नए संविधान के अनुसार डॉ. नजीबुल्लाह को देश का राष्ट्रपति चुना गया।
  • 1991 : एड्स डे की शुरुआत।
  • 1990 : पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित का निधन।
  • 2001 : अफगानिस्तान में कंधार एयरपोर्ट पर तालिबान विरोधी कबायली संगठन का कब्जा।
  • 2008 : बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष शिवचंद्र झा का निधन।


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